अक्सर लोग टीवी ऑन करके फोन पर बिजी हो जाते हैं. कुछ लोगों को लगता है कि यह सिर्फ एक आदत है, या फिर टीवी देखने का मन नहीं उनका. लेकिन साइकोलॉजी इसके पीछे की वजह को बोरियत से नहीं जोड़ती है. दरअसल यह हमारे दिमाग के काम करने के तरीके और फोकस करने की आदत से भी जुड़ा हो सकता है.
अगर आप कोई फिल्म, वेब सीरीज या क्रिकेट मैच देख रहे हैं और बीच-बीच में बार-बार फोन उठा लेते हैं, तो इसका मतलब हमेशा यह नहीं होता कि आपको टीवी पसंद नहीं आ रहा. कई बार हमारा दिमाग एक साथ कई तरह की जानकारी लेने का आदी हो जाता है. ऐसे में सिर्फ एक स्क्रीन पर ध्यान टिकाना मुश्किल लगने लगता है. यही वजह है कि लोग बिना किसी खास वजह के भी फोन चेक करने लगते हैं.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि फोन देखने की आदत कई बार एक तरह का मेंटल एक्शन बन जाता है. दिमाग को हर थोड़ी देर में कुछ नया देखने या जानने की उम्मीद रहती है. जब नोटिफिकेशन, नया पोस्ट या कोई मैसेज मिलता है, तो कुछ समय के लिए अच्छा महसूस होता है. धीरे-धीरे यही आदत बार-बार फोन देखने की वजह बन सकती है.
जब आपका ध्यान टीवी और फोन के बीच बार-बार बदलता है, तो किसी एक चीज पर पूरा फोकस नहीं बन पाता. इससे कई बार फिल्म या शो की कहानी समझने में दिक्कत होती है. साथ ही, दिमाग लगातार नई जानकारी लेने में लगा रहता है, जिससे मेंटल स्ट्रेस भी महसूस हो सकता है.
कभी-कभी फोन देख लेना बिल्कुल आम बात है. लेकिन अगर आप बिना किसी जरूरत के हर कुछ मिनट में फोन उठाने लगते हैं या फोन दूर रखते ही बेचैनी महसूस होती है, तो यह इशारा हो सकता है कि यह आदत जरूरत से ज्यादा बढ़ रही है. ऐसे समय में अपने स्क्रीन टाइम पर ध्यान देना अच्छा रहता है.
अगर आप टीवी देखते समय फोन कम इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो कुछ आसान तरीके अपना सकते हैं. टीवी शुरू करने से पहले फोन को साइलेंट कर दें या थोड़ा दूर रख दें. गैर-जरूरी नोटिफिकेशन बंद कर दें और खुद से तय करें कि शो खत्म होने के बाद ही फोन देखेंगे.