156 साल... बस यहीं तक! इससे ज्यादा नहीं जी पाएगा इंसान, वैज्ञानिकों ने बताई बड़ी वजह

चाहे भविष्य में एंटी-एजिंग तकनीक कितनी भी विकसित क्यों न हो जाए, इंसान की अधिकतम उम्र करीब 156 साल ही हो सकती है.

Anti-ageing
gnttv.com
  • नई दिल्ली ,
  • 23 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:16 PM IST
  • वैज्ञानिकों ने बताया उम्र का आखिरी पड़ाव
  • 156 साल से ज्यादा नहीं जी पाएगा इंसान!

क्या इंसान कभी 200, 300 या फिर 500 साल तक जी सकेगा? क्या आने वाले समय में ऐसी दवा या तकनीक बन जाएगी, जो बुढ़ापे को ही रोक दे? ऐसे सवाल लंबे समय से लोगों के मन में हैं और वैज्ञानिक भी लगातार इसका जवाब तलाश रहे हैं. अब इसी पर हुई एक नई रिसर्च ने चौंकाने वाला दावा किया है. वैज्ञानिकों का कहना है कि मेडिकल साइंस कितनी भी तरक्की कर ले लेकिन इंसान की उम्र की एक जैविक सीमा है, जिसे पार करना मुश्किल है.

गणितीय मॉडल से निकली 156 साल की सीमा
यह रिसर्च वैज्ञानिक जर्नल npj Aging में प्रकाशित हुई है. शोधकर्ताओं ने एक मॉडल तैयार किया, जिसमें यह माना गया कि उम्र बढ़ने से जुड़ी लगभग सभी समस्याओं का इलाज संभव हो गया है. इसके बाद उन्होंने केवल एक ऐसी समस्या को मॉडल में रखा, जिसे आज की चिकित्सा तकनीक ठीक नहीं कर सकती सोमैटिक म्यूटेशन. नतीजे में सामने आया कि अगर उम्र बढ़ाने वाली सभी दूसरी परेशानियां खत्म भी कर दी जाएं, तब भी इंसान की औसत अधिकतम उम्र 156 साल रहेगी.

दिमाग और दिल क्यों बनते हैं सबसे बड़ी रुकावट?
शोध के मुताबिक, शरीर के कई अंग जैसे लिवर लगातार नई कोशिकाएं बनाते रहते हैं. इसलिए उनमें होने वाला नुकसान काफी हद तक ठीक हो जाता है. लेकिन दिमाग की तंत्रिका कोशिकाएं (न्यूरॉन्स) और दिल की मांसपेशियों की कोशिकाएं (कार्डियोमायोसाइट्स) लगभग दोबारा नहीं बनतीं. समय के साथ इनमें डीएनए से जुड़ी छोटी-छोटी गड़बड़ियां आने लगती हैं. यही नुकसान धीरे-धीरे इतना बढ़ जाता है कि इन अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है और आखिरकार यही इंसान की उम्र की अंतिम सीमा तय करता है.

अगर बुढ़ापा ही खत्म हो जाए, तब क्या होगा?
वैज्ञानिकों ने अपने मॉडल में एक काल्पनिक नॉन-एजिंग ह्यूमन की भी कल्पना की, यानी ऐसा इंसान जिस पर उम्र बढ़ने का कोई असर न हो. इस स्थिति में उसकी संभावित औसत उम्र 1,759 साल तक पहुंच सकती थी. लेकिन जैसे ही मॉडल में केवल सोमैटिक म्यूटेशन को जोड़ा गया, यह उम्र घटकर 156 साल रह गई.

क्या भविष्य में यह सीमा टूट सकती है?
शोधकर्ताओं का कहना है कि आज कई ऐसी तकनीकों पर काम हो रहा है, जो उम्र बढ़ने के असर को कम करने का दावा करती हैं. हालांकि अभी तक ऐसी कोई प्रभावी तकनीक नहीं है, जो शरीर की कोशिकाओं में जमा होने वाले सोमैटिक म्यूटेशन को पूरी तरह रोक या ठीक कर सके.

 

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