अगर आप भी नई नोटबुक तभी शुरू करते हैं, जब पुरानी नोटबुक का लास्ट पेज भी भर जाए, तो आपकी यह आदत सिर्फ चीजों को बचाकर रखने की आदत नहीं हो सकती. साइजोकॉजी कहती है कि इसके पीछे व्यक्ति की सोच और किसी काम को पूरा करने की इच्छा जुड़ी हो सकती है.
कुछ लोग किसी काम को बीच में छोड़ना पसंद नहीं करते. उनके लिए अधूरा काम बार-बार दिमाग में आता रहता है. इसलिए वे पहले पुराने काम को पूरा करते हैं और उसके बाद ही नया काम शुरू करते हैं. नोटबुक के मामले में भी ऐसा ही हो सकता है. पुरानी नोटबुक में कुछ पन्ने खाली होने पर उन्हें नई नोटबुक में लिखना शुरू करना उन्हें सही नहीं लगता.
इस आदत को ‘Need for Closure’ यानी किसी काम को पूरा करके मन को संतुष्ट करने की जरूरत से जोड़ा जाता है. ऐसे लोग किसी चीज को पूरी तरह से खत्म करना चाहते हैं. जब तक काम पूरा नहीं होता, उन्हें लगता रहता है कि कुछ बाकी है. यही वजह है कि वे नई शुरुआत से पहले पुरानी चीज को पूरा करना पसंद करते हैं.
ऐसे लोगों में सिस्टेमैटिक और नियम पसंद करने की आदत भी देखी जा सकती है. वे चीजों को एक तय तरीके से करना पसंद करते हैं. उनके लिए पुरानी नोटबुक के कुछ खाली पन्ने केवल खाली जगह नहीं होते, बल्कि एक अधूरे काम की तरह लग सकते हैं. इसलिए वे उसका पूरा इस्तेमाल करने के बाद ही आगे बढ़ना चाहते हैं.
यह आदत कई मामलों में अच्छी हो सकती है. इससे चीजों की बर्बादी कम होती है और व्यक्ति अपने काम को पूरा करने पर ध्यान देता है. लेकिन अगर कोई व्यक्ति हर छोटी बात को पूरा करने के लिए खुद पर बहुत प्रेशर डालने लगे, तो यह परेशानी भी बन सकती है.