वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जेन को 2026 का फिजिक्स नोबेल पुरस्कार दिया गया है. उन्हें आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी में अहम योगदान और अंतरिक्ष से धरती तक पहुंचने वाले बेहद ज्यादा ऊर्जा वाले न्यूट्रिनो कणों की खोज के लिए यह सम्मान दिया. फ्रांसिस हाल्जेन का जन्म बेल्जियम में हुआ था. उन्होंने KU Leuven से पढ़ाई की और 1970 के दशक से अमेरिका की University of Wisconsin-Madison से जुड़े रहे. वे लंबे समय से IceCube प्रोजेक्ट के प्रमुख वैज्ञानिकों में रहे हैं.
अंतरिक्ष में ऐसी कई चीजें हैं जिन्हें सामान्य टेलीस्कोप से देख पाना संभव नहीं है. इन्हीं रहस्यमयी चीजों को समझने में वैज्ञानिकों को एक बेहद खास कण ने मदद की है, जिसे न्यूट्रिनो कहा जाता है. ये कण पदार्थ के आर-पार लगभग बिना रुके गुजर सकते हैं और इसलिए इन्हें पकड़ना बेहद मुश्किल होता है. अब इन्हीं हाई-एनर्जी न्यूट्रिनो के अध्ययन ने वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जेन को 2026 का फिजिक्स नोबेल दिलाया है.
न्यूट्रिनो क्या है?
न्यूट्रिनो बेहद छोटे, लगभग बिना द्रव्यमान वाले और विद्युत रूप से उदासीन कण होते हैं. ये तारों, ब्लैक होल और दूसरी बेहद ऊर्जावान खगोलीय घटनाओं से पैदा हो सकते हैं. इनकी खासियत यह है कि ये दूसरे पदार्थों के साथ बहुत कम प्रतिक्रिया करते हैं. इसलिए ये अंतरिक्ष की लंबी दूरी तय करके पृथ्वी तक पहुंच सकते हैं. वैज्ञानिक इन्हें ब्रह्मांड की दूर-दराज की घटनाओं के ‘संदेशवाहक’ की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं.
दक्षिणी ध्रुव की बर्फ में बनाया गया IceCube
फ्रांसिस हाल्जेन ने सोचा कि दक्षिणी ध्रुव पर मौजूद विशाल बर्फ की परत का इस्तेमाल न्यूट्रिनो पकड़ने के लिए किया जा सकता है. इसी विचार ने आगे चलकर IceCube Neutrino Observatory का रूप लिया. यह कोई सामान्य टेलीस्कोप नहीं है. करीब एक किलोमीटर घन क्षेत्र में फैली अंटार्कटिका की बर्फ के अंदर बेहद संवेदनशील प्रकाश सेंसर लगाए गए हैं. जब कोई न्यूट्रिनो बर्फ के अंदर मौजूद किसी कण से टकराता है, तो बहुत हल्की रोशनी पैदा हो सकती है. सेंसर इसी रोशनी को रिकॉर्ड करते हैं.
कैसे पता चलता है कि कण अंतरिक्ष से आया?
IceCube का सबसे बड़ा काम सिर्फ न्यूट्रिनो पकड़ना नहीं, बल्कि यह पता लगाना भी है कि वे कहां से आए. जब बेहद ऊर्जावान न्यूट्रिनो बर्फ में प्रतिक्रिया करता है, तो उससे बनने वाले संकेतों के आधार पर वैज्ञानिक उसकी दिशा और ऊर्जा का अनुमान लगाते हैं. इससे ब्रह्मांड में मौजूद बेहद ऊर्जावान स्रोतों को समझने का नया रास्ता खुला है. वैज्ञानिकों को ऐसी घटनाओं का अध्ययन करने में मदद मिलती है जिन्हें सिर्फ रोशनी या दूसरे पारंपरिक तरीकों से समझना मुश्किल था.
दिसंबर में मिलेगा नोबेल सम्मान
नोबेल पुरस्कार का आधिकारिक समारोह हर साल 10 दिसंबर को स्टॉकहोम में होता है. विजेताओं को मेडल, डिप्लोमा और पुरस्कार राशि दी जाती है.
सोमवार को 2026 का मेडिसिन नोबेल जर्मनी के पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागेल और अमेरिका के कार्ल डाइसेरोथ को दिया गया था.