Sun-Earth Mission: सूर्य के रहस्यों से खुलेगा पर्दा! भारत लॉन्च करेगा Aditya-L1 मिशन, ISRO करेगा ये स्टडी

Aditya-L1 mission: जल्द ही सूर्य के रहस्यों से पर्दा उठने वाला है. भारत नया मिशन लॉन्च करने वाला है. भारत इसके लिए Aditya-L1 मिशन लॉन्च करने जा रहा है. बता दें, ISRO इस मिशन को जून या जुलाई में लॉन्च करेगा.

भारत लॉन्च करेगा आदित्य-एल1 मिशन
अपूर्वा सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 27 जनवरी 2023,
  • अपडेटेड 9:17 PM IST
  • जून या जुलाई में लॉन्च होगा मिशन 
  • आदित्य-एल1 में हैं सात पेलोड

मंगल मिशन के बाद अब भारत सूरज पर भी स्टडी करने जा रहा है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) इस साल जून या जुलाई तक आदित्य-एल1 मिशन शुरू करने की योजना बना रहा है. आदित्य-एल1 सूरज और सोलर कोरोना पर स्टडी करने वाला पहला भारतीय स्पेस मिशन है. इससे सूरज से रहस्यों के बारे में पता चल सकेगा. भारत के लिए ये अपने तरह की पहली स्टडी है. 

जून या जुलाई में लॉन्च होगा मिशन 

इसरो के चेयरमैन एस. सोमनाथ ने गुरुवार को एक इवेंट में कहा कि आदित्य-एल1 मिशन जून या जुलाई तक लॉन्च किया जाएगा क्योंकि मिशन के लिए लॉन्च विंडो अगस्त तक बंद हो जाएगी. आदित्य-एल1 मिशन को इसरो एल1 ऑर्बिट में लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है. ये ऑर्बिट सूरज और धरती के बीच का पहला लाग्रंगियन पॉइंट (Lagrangian point) है. 

बताते चलें कि लाग्रंगियन पॉइंट स्पेस में एक ऐसी स्थिति होती है जहां कोई भी भेजी गई चीज रखी जाती है. ये पॉइंट किसी भी ग्रह के आसपास की जगह होती है जहां उसके गुरुत्वाकर्षण का खिंचाव, सूर्य का गुरुत्वाकर्षण और कक्षा की गति संतुलित होती है.

आदित्य-एल1 में हैं सात पेलोड

गौरतलब है कि आदित्य-एल1 में सात पेलोड हैं, जिनमें से प्राइमरी पेलोड विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ (VELC) है, जिसे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स, बेंगलुरु द्वारा डिजाइन और निर्मित किया गया है. बता दें, सैटेलाइट में पेलोड उस सैटेलाइट द्वारा ले जाए जाने वाले वैज्ञानिक उपकरण होते हैं. स्पेस ऑपरेशन के हिसाब से किसी भी सैटेलाइट में कितने भी पेलोड सकते हैं. 

वहीं, दूसरे छह पेलोड इसरो और अन्य वैज्ञानिक संस्थानों द्वारा बनाए जा रहे हैं. इसे लेकर इसरो के चेयरमैन एस. सोमनाथ ने बताया, "पृथ्वी और उसके परिवेश पर सूर्य के प्रभाव को समझना अब बहुत जरूरी हो गया है और आदित्य-एल1 का उद्देश्य यही है. इस प्लान को यहां तक लाने में बहुत साल लगे हैं.” 


 

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