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धरती से अंतरिक्ष तक चमका सूरत का हीरा, विक्रम-1 के साथ स्पेस पहुंची 10 लाख की 'लोटस' ज्वेलरी

रजनीकांत चांचड़ के मुताबिक, इस कलेक्शन का नाम 'लोटस कलेक्शन' इसलिए रखा गया क्योंकि हिंदू मान्यता में ब्रह्मा जी के हाथ में कमल होता है और कमल सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है.

vikram 1 mission
संजय सिंह राठौर
  • सूरत,
  • 22 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 5:09 PM IST

गुजरात का सूरत शहर दुनिया भर में डायमंड कटिंग और पॉलिशिंग के लिए जाना जाता है. अब इसी डायमंड सिटी ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भी अपनी खास पहचान बना ली है. भारत के विक्रम-1 मिशन के तहत अंतरिक्ष में भेजे गए रॉकेट के साथ सूरत में तैयार की गई एक खास लैब-ग्रोन डायमंड 'लोटस ज्वेलरी' भी भेजी गई है.

18 कैरेट गोल्ड और 16.16 कैरेट लैब-ग्रोन डायमंड से बनी है ज्वेलरी
यह खास ज्वेलरी सूरत की नित्या जेम्स एंड ज्वेलरी लिमिटेड ने तैयार की है. कमल के आकार वाली इस ज्वेलरी में 18 कैरेट येलो गोल्ड और 16.16 कैरेट के लैब-ग्रोन पियर शेप डायमंड लगाए गए हैं. इसमें कुल 32 डायमंड पीस इस्तेमाल किए गए हैं. इसकी अनुमानित कीमत करीब 10 लाख रुपए है. डायमंड तैयार करने से लेकर पॉलिशिंग और ज्वेलरी बनाने तक का पूरा काम सूरत की फैक्ट्री में ही किया गया.

डिजाइन बनाने में लगा एक महीना
कंपनी के डायरेक्टर रजनीकांत चांचड़ ने बताया कि इस ज्वेलरी को तैयार करना आसान नहीं था. सबसे पहले इसका डिजाइन तैयार करने में करीब एक महीना लगा. इसके बाद इसे बनाने में चार से पांच महीने का समय लगा. इस दौरान कई बार डिजाइन बदला गया, ज्वेलरी को दोबारा बनाया गया और सभी तकनीकी मानकों के अनुसार तैयार किया गया.

ब्रह्मा जी के कमल से मिली 'लोटस कलेक्शन' की प्रेरणा
रजनीकांत चांचड़ के मुताबिक, इस कलेक्शन का नाम 'लोटस कलेक्शन' इसलिए रखा गया क्योंकि हिंदू मान्यता में ब्रह्मा जी के हाथ में कमल होता है और कमल सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है. उनका कहना है कि जब ज्वेलरी को अंतरिक्ष में भेजने की बात आई, तो कमल से बेहतर प्रतीक उन्हें नहीं लगा. इसी सोच के साथ यह खास डिजाइन तैयार किया गया.

स्पेस तक पहुंचा सूरत का डायमंड
रजनीकांत चांचड़ ने कहा कि हर डायमंड कारोबारी का सपना होता है कि उसका हीरा दुनिया के हर घर तक पहुंचे. लेकिन इस बार सूरत का डायमंड धरती से निकलकर अंतरिक्ष तक पहुंच गया. उन्होंने इसे आत्मनिर्भर भारत, भारतीय तकनीक और सूरत के कारीगरों की मेहनत का सम्मान बताया. उनका कहना है कि आने वाले समय में डायमंड का इस्तेमाल केवल ज्वेलरी ही नहीं, बल्कि स्पेस टेक्नोलॉजी, मशीनरी और अन्य आधुनिक क्षेत्रों में भी बढ़ सकता है.

लैब-ग्रोन डायमंड को बताया पूरी तरह असली
चांचड़ ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कोई नकली डायमंड नहीं है. उन्होंने कहा कि लैब-ग्रोन डायमंड और खदान से निकला प्राकृतिक डायमंड, दोनों की गुणवत्ता और मजबूती समान होती है. फर्क सिर्फ इतना है कि एक प्रकृति में बनता है और दूसरा आधुनिक तकनीक की मदद से लैब में तैयार किया जाता है. इसकी पॉलिशिंग और संरचना भी प्राकृतिक डायमंड जैसी ही होती है.

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