Psychology Behind Helping: आपको भी भरी मेट्रो में नहीं देता कोई सीट, तो उन्हें जज करने से पहले.. जान लें क्या कहती है साइकोलॉजी?

अक्सर लोगों के साथ होता है कि वह बस या मेट्रो में चढ़ते हैं. उन्हें किसी मजबूरी के चलते सीट की जरूरत होती है, लेकिन कोई अपनी सीट देता नहीं है. ऐसे में वह लोगों को जज करते हैं. लेकिन इस जज करने के पीछे मनोविज्ञान भी बहुत कुछ कहता है.

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gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 10 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 3:06 PM IST

अक्सर ऐसा होता है कि कई बार बस या मेट्रो में कोई बुजुर्ग, गर्भवती या कोई ऐसा चढ़ता है, जिसको सीट की ज्यादा जरूरत होती है. लेकिन, ऐसे में बहुत बार होता यह है कि वह सबसे पहले इधर-उधर कोई खाली सीट देखता है, अगर नहीं मिलती है तो उम्मीद करता है कोई अपनी सीट उसे दे दे. कई बार उन्हें कोई अपनी सीट ऑफर कर भी देता है, लेकिन कई बार लोग देख कर भी अनदेखा कर देते हैं. 

अब सवाल पैदा होता है कि किसी जरूरतमंद को कोई बस या मेट्रो में अपनी सीट ऑफर करने से आखिर क्यों कतराता है. इसके पीछे की वजह को मनोविज्ञान काफी अच्छी तरह से समझाता है.

कोई और कर देगा मदद

मनोविज्ञान की एक थ्योरी कहती है कि कई लोगों के सामने यही हालात पैदा होते हैं. लेकिन वह अपनी सीट को केवल इस वजह से ऑफर नहीं करते हैं, क्योंकि वह मानते हैं कि शायद उनकी कोई और अपनी सीट दे देगा. वह खुद की जिम्मेदारी को इस थ्योरी के मुताबिक कम समझते हैं.

जितनी ज्यादा भीड़, उतनी कम जिम्मेदारी

मनोविज्ञान की एक थ्योरी कहती है, कि ऐसे हालात पैदा होते हैं तो बस या मेट्रो में जितनी ज्यादा भीड़ होती है, जिम्मेदारी उतनी ही कम होती जाती है. ज्यादा भीड़ होने का मतलब है एक जिम्मेदारी दूसरे पर डालना. हर कोई सोचता है कि दूसरा मदद करने के लिए उससे बेहतर स्थिति में है. इसी के चलते वह मदद नहीं करता.

अनजाने में अनदेखा हो जाना

मनोविज्ञान यह भी कहता है कि कई बार ऐसा भी होता है कि वाकई कोई किसी काम में बिजी हो, और वह देखना भूल गया हो कि किसी को सीट की जरूरत है. ऐसे में वह सीट ऑफर नहीं कर पाता है. इसका मतलब यह नहीं है कि उनसे मन में दूसरे के प्रति मदद करने की मंशा नहीं है.

मदद करने के पर्सनल कारण

कई बार लोग किसी की मदद करने से पहले खुद के हालात को देखते हैं. हो सकता है कि किसी की कमर में दर्द हो, या कोई बीमारी हो जिसके कारण वह चाह कर भी सीट नहीं दे पा रहा है. 

हालात को देखते हुए आती है मदद की भावना

मनोविज्ञान कहता है कि कुछ लोगों के साथ ऐसा भी होता है कि वह लोगों को देखने के बाद उनकी मदद करने की सोचते हैं. कोई किसी गर्भवती महिला को देखकर मदद करने के लिए ज्यादा जल्दी सीट ऑफर कर सकता है, या फिर किसी बुजुर्ग को जल्दी सीट मिल सकती है. यानी इसका सीधा मतलब होता है कि लोग कई बार दूसरी की सिचुएशन को देखकर मदद करते हैं.

 

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