ओडिशा के जगन्नाथ पुरी में आठ दिनों तक मौसी के घर गुंडिचा मंदिर में विश्राम के बाद भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की बाहुड़ा यात्रा का शुभारंभ हो गया है. तीनों विग्रह अपने धाम श्री मंदिर की ओर प्रस्थान कर रहे हैं. इस तीन किलोमीटर की यात्रा में लाखों श्रद्धालु शामिल होकर रथ खींच रहे हैं. यात्रा के दौरान तीनों रथ मौसीमा मंदिर पर रुकते हैं, जहां भगवान को पारंपरिक पोड़ा पीठा का भोग अर्पित किया जाता है. बाहुड़ा यात्रा के अगले दिन महाप्रभु का सोना वेष अनुष्ठान आयोजित किया जाता है, जिसमें विग्रहों को स्वर्ण आभूषणों से सजाया जाता है. इसके बाद द्वादशी तिथि को अधर पाना की रस्म में मिट्टी के पात्रों में मीठा पेय अर्पित कर उन्हें तोड़ दिया जाता है. रथयात्रा का अंतिम अनुष्ठान नीलाद्री विजय होता है, जिसमें भगवान जगन्नाथ रूठी हुई देवी लक्ष्मी का मान भंजन करने के लिए उन्हें रसगुल्ला अर्पित करते हैं. इसके पश्चात महाप्रभु पुनः रत्न सिंहासन पर विराजमान होते हैं.