छोटी दीपावली के पावन अवसर पर अयोध्या नगरी दुल्हन की तरह सज चुकी है. राम की पैड़ी के 55 घाटों पर इस बार 30 लाख से भी अधिक मिट्टी के दीये एक साथ प्रज्वलित किए गए हैं. सरयू तट पर आधुनिक लेजर शो, 3D मैपिंग और ड्रोन शो के माध्यम से रामायण के पावन प्रसंग जीवंत हो उठे. विशेष चर्चा में गोपेश जी ने दीपावली के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि इस दिन आदि गौमाता भगवती सुरभि और समुद्र मंथन से मां महालक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था. साथ ही 14 वर्ष के वनवास के पश्चात भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की लोकमान्यता जुड़ी है. उन्होंने धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और यम द्वितीया जैसे पंचपर्वों के धार्मिक महत्व और साधना के नियमों को भी साझा किया.