गणेश उत्सव की शुरुआत से पहले मुंबई के प्रसिद्ध 'लालबागचा राजा' की पहली झलक सामने आ गई है. इस साल पंडाल को रामेश्वरम की भव्य थीम पर सजाया गया है, जिसमें त्रिशूल, डमरू और हीरों से पूरे परिसर को अलौकिक रूप दिया गया है. 1935 से कांबली परिवार द्वारा पारंपरिक रूप से गढ़ी जा रही बप्पा की यह प्रतिमा 92वें वर्ष में भी भक्तों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है. रिपोर्ट में लालबागचा राजा के दर्शन के साथ-साथ भगवान गणेश के प्रिय मिष्ठान मोदक के महत्व और इतिहास पर भी प्रकाश डाला गया है. महाराष्ट्र के पारंपरिक 'उकडीचे मोदक' से लेकर दिल्ली के चांदनी चौक में बनने वाले आधुनिक फ्लेवर्स वाले मोदक तक, गणेशोत्सव के अवसर पर बाजारों में मोदक की भारी मांग देखी जा रही है. बप्पा को 21 मोदक चढ़ाने की पौराणिक परंपरा और उससे जुड़ी कथाओं का भी इसमें उल्लेख किया गया है.