ओडिशा के पुरी में महाप्रभु जगन्नाथ की बाहुड़ा यात्रा का आयोजन किया गया. गुंडिचा मंदिर में आठ दिनों के प्रवास के बाद भगवान जगन्नाथ, अपने भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ मुख्य धाम श्रीमंदिर की ओर प्रस्थान किया. तीन किलोमीटर लंबे यात्रा मार्ग पर भगवान बलभद्र का तालध्वज, देवी सुभद्रा का दर्पदलन और भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ श्रद्धालुओं द्वारा खींचा गया. वापसी की इस यात्रा के दौरान रथ मौसी मां के मंदिर में रुकता है, जहां भगवान को पोड़ा पीठा का भोग अर्पित किया जाता है. यात्रा के दौरान सुरक्षा के इंतजाम किए गए और पुलिस बल की तैनाती रही. श्रीमंदिर पहुंचने के बाद अगले दिन सुना वेश अनुष्ठान आयोजित होगा, जिसमें प्रतिमाओं को स्वर्ण वस्त्रों और आभूषणों से सजाया जाता है. इसके पश्चात अधर पाना की परंपरा निभाई जाएगी, जिसमें देवताओं को विशेष पेय अर्पित किया जाता है. अंतिम चरण में नीलाद्री विजय अनुष्ठान के दौरान भगवान जगन्नाथ द्वारा माता लक्ष्मी को रसगुल्ला अर्पित करने के बाद मुख्य मंदिर में प्रवेश की प्रक्रिया पूरी होगी.