सोशल मीडिया पर भ्रामक दावों के साथ शेयर किए जा रहे दो अलग-अलग वीडियो की पड़ताल की गई है. पहले मामले में 16 अक्टूबर को दिल्ली के सेंट्रल पार्क में कांग्रेस जनता पार्टी द्वारा निकाले गए तिरंगा मार्च के नाम पर एक वीडियो वायरल किया गया, जिसमें बस पर तिरंगा लिए लोग दिख रहे हैं. पड़ताल में सामने आया कि यह वीडियो दिल्ली का नहीं बल्कि 19 अगस्त 2026 को पटना में राष्ट्रीय जनता दल द्वारा निकाले गए राजभवन मार्च का है, जहां तेजस्वी यादव को हिरासत में लिया गया था. दूसरे मामले में पंजाब में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद अंबाला हाईवे पर पुलिस द्वारा गोलियां और आंसू गैस के गोले चलाने का दावा किया गया. जांच में यह दावा भी पूरी तरह गलत साबित हुआ. यह वीडियो अगस्त 2026 में पंजोखरा साहिब विवाद के बाद अंबाला हाईवे पर लगे जाम को हटाने के दौरान हुई पुलिस झड़प का है, जिसका परविंदर सिंह हत्याकांड या पंजाब बंद से कोई संबंध नहीं है.