दशहरे के बाद काशी, अयोध्या और प्रयागराज में पारंपरिक भरत मिलाप का आयोजन श्रद्धा और उल्लास के साथ हुआ. काशी के नाटी इमली मैदान में 484वें वर्ष की ऐतिहासिक रामलीला में डूबते सूर्य की किरणों के बीच चारों भाइयों का मिलाप देखने लाखों श्रद्धालु पहुंचे. अयोध्या में मोदनवाल समाज द्वारा आयोजित भरत मिलाप में साधु-संतों और नागरिकों ने राम दरबार की आरती उतारी. प्रयागराज में भी धार्मिक झांकियों के साथ उत्सव मना, जबकि कर्नाटक के मंगलुरु में भव्य शोभायात्रा के साथ दशहरा उत्सव संपन्न हुआ. वहीं, अयोध्या में 10वें दीपोत्सव की भव्य तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू हो गई हैं. इस वर्ष 30 लाख दीये जलाकर नया रिकॉर्ड बनाने का लक्ष्य है. राम की पैड़ी समेत 56 घाटों पर मार्किंग और रंगाई-पुताई का काम शुरू हो चुका है. गोदामों में पांच लाख दीयों की पहली खेप पहुंच चुकी है और अवध विश्वविद्यालय के करीब 35 हजार स्वयंसेवक इस महाआयोजन में जुट रहे हैं.