राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत, सीबीएसई ने स्कूलों के लिए एक नया थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला पेश किया है, जो शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 6 के लिए अनिवार्य होगा. इस नियम के अनुसार, छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए. इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य छात्रों में बहुभाषावाद को बढ़ावा देना और सांस्कृतिक एकीकरण को मजबूत करना है. यह व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी और 2030-31 तक कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षाओं तक पूरी तरह से प्रभावी हो जाएगी. इस नीति में अंग्रेजी को एक विदेशी भाषा के विकल्प के रूप में रखा गया है. हालांकि, इस फॉर्मूले को लागू करने में स्कूलों के सामने कई चुनौतियां हैं, जिनमें क्षेत्रीय भाषाओं के योग्य शिक्षकों की कमी और आवश्यक संसाधनों का अभाव प्रमुख है. इन समस्याओं से निपटने के लिए डिजिटल माध्यमों और ऑनलाइन शिक्षकों के उपयोग जैसे समाधानों पर विचार किया जा रहा है, ताकि अभिभावकों पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े.