चैत्र प्रतिपदा और हिंदू नववर्ष के साथ चैत्र नवरात्र का शुभारंभ हो चुका है। देशभर में मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा आराधना हो रही है। महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में गुड़ी पड़वा का त्योहार भी धूमधाम से मनाया जा रहा है। प्रयागराज में संगम तट पर स्थित अलोपी शंकरी शक्तिपीठ में देवी की मूर्ति नहीं बल्कि पालने की पूजा होती है। यहां माता सती के दाहिने हाथ का पंजा गिरकर अदृश्य हो गया था, इसलिए यहां निराकार अवस्था में देवी विराजमान हैं। पालने के नीचे श्री यंत्र स्थापित है और उसी कुंड के जल को प्रसाद के रूप में दिया जाता है। संतान प्राप्ति की मनोकामना लेकर आने वाले दंपतियों की मुराद पूरी होती है। झांसी में मां मनिया देवी का मंदिर भी अनोखा है, जहां देवी हर दिन तीन बार स्वरूप बदलती हैं - सुबह बाल अवस्था, दोपहर में युवावस्था और शाम में वृद्धावस्था में। यहां आल्हा-ऊदल से जुड़ी बलिदान की कथा प्रसिद्ध है। झांसी के एक अन्य मंदिर में मां काली का सौम्य बाल रूप विराजमान है, जो देश में दुर्लभ है।