चैत्र नवरात्रि के शुभारंभ के साथ ही 19 मार्च से हिंदू नववर्ष भी प्रारंभ हो रहा है। देशभर के मंदिरों में मां दुर्गा के स्वागत की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ मां शैलपुत्री की पूजा होती है। मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री मानी जाती हैं और इन्हें सफेद फूलों का हार तथा सफेद वस्त्र अर्पित किया जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार महिषासुर के वध के लिए देवताओं की शक्तियों से माँ दुर्गा प्रकट हुई थीं। नौ दिनों की लड़ाई के बाद दसवें दिन महिषासुर का वध हुआ। दिल्ली के कालकाजी मंदिर समेत देशभर के शक्तिपीठों में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। मंदिरों को रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया है और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के नौ स्वरूपों की उपासना से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। नवरात्रि व्रत के दौरान राजगीरे का चीला, कुट्टू का आटा, समक के चावल और मखाना जैसे सात्विक आहार का सेवन करना चाहिए।