दिल्ली की तीन जेलों - तिहाड़, मंडोली और रोहिणी - में करीब 21 हज़ार कैदी बंद हैं, जिनमें से 90 फीसदी विचाराधीन हैं। हर रोज़ इन जेलों से 1200 से 1400 कैदियों को दिल्ली की सात अदालतों में पेशी के लिए ले जाया जाता है। यह जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस की न्यायिक अभिरक्षा वाहिनी (NAV) की है, जिसे पहले Third Battalion के नाम से जाना जाता था। फरवरी 2024 में इसका नाम बदलकर NAV कर दिया गया। एक जेल वैन में 45 कैदी और केवल 6 पुलिसकर्मी होते हैं। इन वैनों में कातिल, आतंकवादी, डॉन और रेपिस्ट एक साथ यात्रा करते हैं। कई बार गैंग वॉर की स्थिति से निपटने के लिए पुलिस को मिर्च पाउडर का इस्तेमाल करना पड़ता है। हर रोज सुबह साढ़े दस बजे तक सभी वैन कोर्ट पहुंच जाती हैं और शाम साढ़े चार बजे वापसी शुरू होती है। NAV में करीब ढाई हज़ार पुलिसकर्मी हैं, जो 45 साल से कम उम्र के युवा जवान हैं। विदेशी कैदियों को एयरपोर्ट तक पहुंचाना और एक्सट्रेडिशन के मामलों को संभालना भी NAV की जिम्मेदारी है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई की नई पहल शुरू हो चुकी है, जिससे सालाना 39-40 करोड़ रुपए की बचत हो सकती है।