उज्जैन में आयोजित 'धर्म संसद' कार्यक्रम के दौरान महाकाल मंदिर दर्शन, महाकाल लोक कॉरिडोर की भव्यता और सनातन धर्म के सिद्धांतों पर विस्तृत चर्चा हुई. कार्यक्रम में महामंडलेश्वर सुमनानंद महाराज, स्वामी शैलेशानंद और शर्मा महाराज सहित अखाड़ों के प्रमुख संतों ने सिंहस्थ कुंभ की पौराणिक पृष्ठभूमि, अमृत कलश की कथा, संत परंपरा और कुंभ स्नान के महत्व पर विचार व्यक्त किए. संतों ने तीर्थाटन और धार्मिक पर्यटन के बढ़ते प्रभाव पर मंथन करते हुए कहा कि कुंभ केवल जल स्नान या पर्यटन का केंद्र नहीं, बल्कि संतों की साधना और आत्मशांति का पर्व है. इस दौरान धार्मिक स्थलों की मूल मर्यादा और पवित्रता बनाए रखने पर जोर दिया गया. चर्चा में सावन महीने में शिव भजनों के महत्व, विभिन्न ज्योतिर्लिंगों के दर्शन और भक्ति संगीत में नए वाद्ययंत्रों के उपयोग का उल्लेख किया गया. इसके साथ ही युवाओं में सनातन धर्म के प्रति बढ़ती आस्था और इसके वैज्ञानिक दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए समाज में आध्यात्मिक चेतना जगाने का आह्वान किया गया.