दिवाली केवल दीपों का त्योहार नहीं, बल्कि सनातन धर्म के पौराणिक इतिहास और आस्था का महापर्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार 14 वर्ष के वनवास और रावण वध के बाद जब भगवान राम अयोध्या लौटे, तब कार्तिक कृष्ण अमावस्या पर अयोध्यावासियों ने घी के दीपक जलाकर पहली दिवाली मनाई थी। इसके अलावा द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा सत्यभामा के सहयोग से नरकासुर का वध करने की स्मृति में छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक अमावस्या पर ही देवी लक्ष्मी के प्राकट्य के कारण इस दिन लक्ष्मी पूजन की परंपरा स्थापित हुई। पूर्वी भारत में इसी रात मां काली द्वारा असुरों के संहार पर काली पूजा होती है, तो दक्षिण भारत में वामन अवतार और राजा बलि की कथा जुड़ी है। पांडवों द्वारा इंद्रप्रस्थ की स्थापना से भी इस पावन तिथि का संबंध माना जाता है।