विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की रिपोर्ट के अनुसार, प्रशांत महासागर में बढ़ते अल नीनो प्रभाव के कारण भारत में मानसून कमजोर रहने की आशंका है. उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में सामान्य से कम बारिश के चलते धान की बुवाई और खरीफ फसलें प्रभावित हुई हैं. इसके अलावा, देश के कई हिस्सों में भूजल स्तर में गिरावट और सिंचाई के महंगे साधनों ने कृषि क्षेत्र में संकट बढ़ा दिया है. विशेषज्ञों के मुताबिक, आवारा पशुओं द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाए जाने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) व सेमीकंडक्टर डेटा सेंटर्स में पानी की अधिक खपत से जल संकट और गहरा गया है. कृषि विशेषज्ञों ने किसानों के नुकसान को कम करने के लिए सूखा प्रतिरोधी फसलों, सूक्ष्म सिंचाई और पारंपरिक जल संरक्षण तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया है, ताकि कृषि क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन के इस प्रभाव से बचाया जा सके.