देशभर के कोचिंग संस्थानों और लाइब्रेरी में फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी एक समस्या बनी हुई है. लखनऊ अग्निकांड के बाद भी दिल्ली, गाजियाबाद, भोपाल और जयपुर जैसे शहरों में कोचिंग सेंटर्स संकरी गलियों में बिना सुरक्षा मानकों के संचालित हैं. इन संस्थानों में प्रवेश और निकास के लिए केवल एक ही रास्ता है, और बाहर बिजली के तारों का जाल फैला है. अधिकांश इमारतों में अग्निशमन यंत्र, फायर अलार्म, स्प्रिंकलर सिस्टम और आपातकालीन निकास की व्यवस्था नहीं है. नियमों का उल्लंघन कर ऊपरी मंजिलों पर कक्षाएं चलाई जा रही हैं, जिससे आपातकालीन स्थिति में फायर ब्रिगेड या एंबुलेंस का पहुंचना लगभग असंभव है. ऐसे में छात्रों और अभिभावकों को दाखिला लेने से पहले संस्थान की फायर एनओसी, सुरक्षा इंतजामों और एंट्री-एक्जिट रास्तों की जांच करनी चाहिए. प्रशासन को भी इन कोचिंग सेंटर्स पर नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराना होगा ताकि हादसों को रोका जा सके.