देशभर में गणेश उत्सव को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. इस विशेष बुलेटिन में गणेश उत्सव के ऐतिहासिक और सामाजिक महत्व पर चर्चा की गई. कोंकण क्षेत्र, छत्रपति शिवाजी महाराज और पेशवाओं के दौर से शुरू हुई गणेश पूजन की परंपरा आगे चलकर स्वतंत्रता आंदोलन का बड़ा माध्यम बनी. 1893 में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और भाऊसाहेब रंगारी ने गणेश उत्सव को सार्वजनिक रूप देकर समाज को एकजुट करने और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाने का जरिया बनाया. इसके साथ ही राजस्थान के जयपुर स्थित मोती डूंगरी गणेश मंदिर में आयोजित सात दिवसीय उत्सव की तैयारियों का ब्योरा दिया गया, जहां बप्पा को 15 हजार किलो सामग्री से तैयार 2.5 लाख मोदकों का भोग लगाया गया. इसमें 251 किलो के दो विशाल मोदक विशेष आकर्षण का केंद्र रहे.