देशभर में गणेश उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है. गणेश चतुर्थी पर विधि-विधान से स्थापित गणपति की प्रतिमाओं के विसर्जन का धार्मिक और आध्यात्मिक रहस्य बेहद खास है. सनातन परंपरा में शरीर को विनाशी और आत्म चेतना को अविनाशी माना गया है, जिसे बहते पानी में विसर्जित कर चेतना को जन-जन तक पहुंचाने का भाव समाहित है. कई लोग अपनी सुविधा और नियमों के पालन के आधार पर डेढ़, तीन या पांच दिनों में भी बप्पा का विसर्जन करते हैं. वहीं पुणे के श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति पंडाल को इस बार वृंदावन के प्रेम मंदिर की तर्ज पर सजाया गया है. इसके अलावा आंध्र प्रदेश के अनाकापल्ली में 21 हजार जीवित पौधों से और महाराष्ट्र के वाशिम में सौंफ, लौंग व सुपारी जैसी सामग्रियों से पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाली इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं.