ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शरीर में स्थित नौ ग्रहों की तरंगों के असंतुलन से कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं और बीमारियां उत्पन्न होती हैं. इन रोगों से बचाव के लिए यंत्र, मंत्र और उपयुक्त रत्नों के प्रयोग का विधान है. नियमित रूप से ‘ॐ अच्युताय नमः, ॐ अनन्ताय नमः, ॐ गोविन्दाय नमः’ मंत्र का जाप स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है. विभिन्न रोगों के निवारण के लिए अलग-अलग रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है; जैसे माणिक्य हृदय रोग में, मोती रक्तचाप में, मूंगा बुखार में, पन्ना मानसिक तनाव में, पुखराज पेट की बीमारियों में, नीलम स्नायु तंत्र में और हीरा मधुमेह में उपयोगी होता है. राहु का गोमेद और केतु का लहसुनिया सहायक रत्न हैं, जिन्हें बिना विचार किए पहनने से समस्याएं बढ़ सकती हैं. लग्न के आधार पर सही रत्न का चयन आवश्यक है; जैसे मेष, सिंह और धनु के लिए माणिक्य या मूंगा, वृषभ, तुला और कुंभ के लिए नीलम, ओपल या हीरा, मिथुन, कन्या और मकर लग्न के लिए पन्ना तथा कर्क, वृश्चिक और मीन लग्न के लिए मूंगा और मोती धारण करना लाभदायक माना जाता है.