यह कथा रामकथा के रश्म से जुड़ी है, जहाँ भगवान श्री सीताराम जी सरकार के पाद कमलों को प्रणाम किया गया. इसमें कौशल्या अम्बा, गंगा मैया, भारत भूमि, बागेश्वर धाम और गुड़ियारी वाले श्री हनुमान जी महाराज का स्मरण किया गया. छत्तीसगढ़ की भूमि का विशेष उल्लेख किया गया, जिसे राम जी से भांजे का अद्भुत नाता प्राप्त है. कथा में कहा गया कि "इस दुनिया में ऐसा कौन है, जिसे पद पाने के बाद अभिमान न हुआ? कौन है संसार में जो पद पर प्रतिष्ठित होने के बाद अभिमान न हुआ और भैया जो अभिमान नहीं हुआ? समझ लीजिये उसके ऊपर गुरु का बड़ा भरत हस्त है." यह भी बताया गया कि पद, नाम, कीर्ति, यश और वैभव आनी जानी माया है, जबकि असली माया तो हमारे भीतर की राम की छाया है.