भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए रक्षा समझौता हुआ है, जिसकी कुल लागत लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये है. 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत 96 विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा. यह सहयोग को-डिजाइन, को-प्रोडक्शन और जेट इंजन तकनीक के ट्रांसफर पर केंद्रित है. यह तकनीक स्वदेशी एमका (AMCA) और तेजस मार्क-2 कार्यक्रमों को मजबूती प्रदान करेगी. इसके साथ ही, भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल मरीन विमानों का सौदा भी फाइनल हो चुका है, जिनकी आपूर्ति 2029 से शुरू होगी. रणनीतिक रूप से, इन विमानों को अंबाला और हासिमारा एयरबेस पर तैनात किया गया है, जो चीन और पाकिस्तान की सीमाओं से 200 किलोमीटर की दूरी पर हैं. राफेल में मेट्योर और स्कैल्प मिसाइलें शामिल हैं. भारत में राफेल इंजनों के लिए मेंटेनेंस और रिपेयर सुविधा भी स्थापित की जाएगी, जिससे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और अंतरिक्ष एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग मजबूत होगा.