भारत ने अपनी परमाणु क्षमता और न्यूक्लियर ट्रायड को मजबूत करते हुए रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. 3 अप्रैल 2026 को आईएनएस अरिधमन के नौसेना में शामिल होने के साथ ही भारत के पास अब तीन परमाणु पनडुब्बियां हो गई हैं. इससे पहले 25 दिसंबर 2025 को आईएनएस अरिघात से 3500 किलोमीटर रेंज वाली के-4 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया था, जो हाइपरसोनिक गति में सक्षम है. 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास 180 और पाकिस्तान के पास 170 परमाणु हथियार हैं. भारत 'नो फर्स्ट यूज' नीति का पालन करता है, लेकिन जल, थल और नभ से हमला करने की सेकंड स्ट्राइक क्षमता रखता है. भारत की रक्षा प्रणाली में अग्नि मिसाइलें और एस-400 सिस्टम शामिल हैं, जबकि पाकिस्तान ने खुश्दार और सरगोधा जैसे ठिकानों पर मिसाइलें तैनात की हैं. ग्लोबल फायरपावर रैंकिंग में भारत चौथे स्थान पर है. परमाणु हथियारों के विनाशकारी प्रभाव और रेडिएशन के खतरे को देखते हुए भारत अपनी सामरिक सुरक्षा और स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम को निरंतर सुदृढ़ कर रहा है.