भारतीय वायुसेना अपनी मारक क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए 1000 किलोग्राम वजन वाले 600 स्वदेशी हवाई बमों की खरीद प्रक्रिया शुरू कर रही है. रक्षा मंत्रालय ने 'मेक 2' और 'बाय इंडियन आईडीडीएम' श्रेणी के तहत इनके डिजाइन और विकास को मंजूरी दी है. ये बम अमेरिकी एमके-84 की श्रेणी के होंगे, जो दुश्मन के बंकरों, रनवे और सैन्य मुख्यालयों को नष्ट करने में सक्षम हैं. डीआरडीओ द्वारा विकसित 1000 किलो का विंग्ड ग्लाइड बम 'गौरव' और 550 किलो का 'गौतम' बम इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं. गौरव बम की मारक क्षमता 100 किलोमीटर तक है, जिसका सुखोई-30 एमकेआई से सफल परीक्षण किया जा चुका है. वर्तमान में वायुसेना के बेड़े में स्पाइस 2000, सुदर्शन और सॉ (SAAW) जैसे आधुनिक हथियार शामिल हैं. मिडिल ईस्ट के हालिया संघर्षों से सीख लेते हुए सेना को इन स्वदेशी स्मार्ट बमों से लैस किया जा रहा है. यह पहल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और विदेशी निर्भरता कम करने के उद्देश्य से की गई है.