21 मार्च 2026 को ईरान की दो बैलिस्टिक मिसाइलों ने इसराइल के बहुस्तरीय एयर डिफेंस सिस्टम को भेदकर डिमोना और अरात के रिहाशी इलाकों को निशाना बनाया, जिसमें 180 से अधिक लोग घायल हुए. रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने इन हमलों की सटीकता बढ़ाने के लिए चीन के Beidou सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल किया हो सकता है. इस घटना ने हवाई रक्षा प्रणालियों की चुनौतियों को उजागर किया है. इसी परिप्रेक्ष्य में, भारत अपनी सीमाओं पर एक मजबूत हवाई रक्षा कवच स्थापित कर रहा है. भारत ने रूस से प्राप्त पांच S-400 एयर डिफेंस सिस्टम में से तीन को तैनात किया है, जो 400 किलोमीटर की रेंज में कई लक्ष्यों को भेद सकता है. इसके अतिरिक्त, भारत के पास स्वदेशी आकाश मिसाइल और दो-स्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रणाली भी मौजूद है. भविष्य की जरूरतों को देखते हुए, DRDO 'प्रोजेक्ट कुश' के तहत 2028 तक एक स्वदेशी लॉन्ग रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (LRSAM) प्रणाली विकसित कर रहा है, जो 350 किलोमीटर तक की रेंज में दुश्मन के विमानों और मिसाइलों को नष्ट करने में सक्षम होगी.