विशेष कार्यक्रम में भगवान शिव और मां आदिशक्ति के दिव्य मिलन तथा सनातन परंपरा में उनके गूढ़ और विराट स्वरूप का तात्विक विश्लेषण किया गया है। शिव को केवल देवों के देव महादेव ही नहीं, बल्कि करुणा, त्याग, तप, न्याय और कल्याण का प्रतीक बताया गया है। आदि गुरु शंकराचार्य रचित 'निर्वाण षट्कम' के माध्यम से शिव के पारलौकिक और सूक्ष्म स्वरूप को समझाते हुए स्पष्ट किया गया है कि अखिल ब्रह्मांड में व्याप्त विशुद्ध चेतना ही शिव है। देखें स्पेशल रिपोर्ट.