Unidentified speaker ने मकर संक्रांति, लोहड़ी, पोंगल और माघ बिहू को प्रकृति-उत्सव बताते हुए उत्तरायण के साथ ‘शुभ दिनों’ की शुरुआत का वर्णन किया। वक्ता के अनुसार ‘प्रत्येक वर्ष 14 जनवरी को मनाया जाने वाले मकर संक्रांति के त्यौहार का सनातन परंपरा में अद्भुत महिमा है।’ ट्रांसक्रिप्ट में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश, पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य, तिल-गुड़ और खिचड़ी के महत्व, तथा सूर्य को अर्घ्य देने और मंत्र-जप/पाठ जैसे कर्मकांडों का उल्लेख है। लोहड़ी की खरीदारी, रेवड़ी-गज्जक की मांग और दुल्ला भट्टी से जुड़ी लोककथा का जिक्र भी किया गया। साथ ही ‘दान के नियम’ बताते हुए अन्न, घी, वस्त्र, कंबल और तिल दान की बात कही गई।