बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के अचानक हुए निधन से सिनेमा जगत और विशेषकर महाराष्ट्र के किसानों में शोक की लहर फैल गई है. नाना पाटेकर ने अपने जीवन में रील लाइफ से अधिक रियल लाइफ में मसीहा की भूमिका निभाई. साल 2015 में जब महाराष्ट्र में किसान सूखे और आत्महत्या से जूझ रहे थे, तब उन्होंने अपनी डेढ़ करोड़ रुपये की कार का बजट किसान परिवारों में बांट दिया और बाद में नाम फाउंडेशन बनाकर किसानों व उनके बच्चों के कल्याण के लिए बड़े स्तर पर काम किया. अभिनय के अलावा नाना ने 1999 के कारगिल युद्ध में क्विक रिएक्शन टीम के साथ मोर्चे पर दो महीने तक देश सेवा की थी. परिंदा की शूटिंग में गंभीर रूप से झुलसने और सलाम बॉम्बे में असली चाकू लगने के बावजूद उन्होंने कभी अभिनय से समझौता नहीं किया. 13 साल की उम्र में 35 रुपये के लिए संघर्ष करने वाले नाना पाटेकर अपने पीछे मानवीय सरोकारों और दमदार अभिनय की अमिट विरासत छोड़ गए हैं.