शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की विधि-विधान से पूजा की जाती है। अष्टभुजी देवी मां कूष्मांडा को सौर ऊर्जा और सृष्टि की रचना से जोड़ा गया है। मान्यता है कि मंद-मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की उत्पत्ति करने वाली मां कूष्मांडा की आराधना से जटिल रोगों, कष्टों और व्याधियों से मुक्ति मिलती है तथा आयु, यश, बल और समृद्धि की प्राप्ति होती है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार देवी कूष्मांडा का संबंध बुध ग्रह और अनाहत चक्र से है। इनकी उपासना के दौरान हरे वस्त्र धारण करना, हरी इलायची, सौंफ या कुम्हड़ा अर्पित करना लाभकारी माना गया है। साथ ही मालपुए और पेड़े का भोग लगाने तथा मां के सिद्ध मंत्रों और दुर्गा कवच का पाठ करने से जीवन में सुख-शांति का वास होता है।