मस्तिष्क विज्ञान के क्षेत्र में ऐतिहासिक खोज के लिए Karl Deisseroth, Peter Hegemann और Georg Nagel को Medicine के Nobel Prize से सम्मानित किया गया है. इन वैज्ञानिकों ने Optogenetics तकनीक विकसित की है, जिसमें रोशनी की मदद से दिमाग की तंत्रिका कोशिकाओं यानी neurons को on या off किया जा सकता है. हरे शैवाल Chlamydomonas में पाए जाने वाले channelrhodopsin protein की खोज से शुरू हुई इस तकनीक ने वैज्ञानिकों को दिमाग के जटिल circuits को समझने और नियंत्रित करने का एक नया माध्यम दिया है. इस विधि से मस्तिष्क की विशिष्ट कोशिकाओं की गतिविधि को सटीक रूप से चालू या शांत करके उनके व्यवहार, याददाश्त और विभिन्न बीमारियों से संबंधों का अध्ययन संभव हुआ है. यह तकनीक Alzheimer's, Parkinson's, मिर्गी, depression, पुराने दर्द और अंधेपन जैसी गंभीर neurological और psychiatric बीमारियों के इलाज में मददगार साबित हो सकती है. भारत के प्रमुख अनुसंधान संस्थानों में इस पर शोध जारी है, हालांकि आम मरीजों तक इसके नैदानिक इस्तेमाल में कुछ समय लग सकता है.