सावन के दूसरे सोमवार के अवसर पर देशभर के शिव मंदिरों और सोमनाथ, उज्जैन के महाकाल तथा काशी विश्वनाथ जैसे प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. भक्त महादेव का जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक कर पूजा-अर्चना कर रहे हैं. सनातन परंपरा में शिवलिंग पर जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और पंचामृत अभिषेक का विशेष महत्व है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान विषपान करने के बाद भगवान शिव के शरीर की तपन शांत करने और उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए देवों और ऋषियों ने जलाभिषेक की परंपरा शुरू की थी. इसके अलावा, इसके पीछे गहरे वैज्ञानिक कारण भी हैं. कॉस्मिक ऊर्जा के केंद्र शिवलिंग के तापमान को नियंत्रित रखने और वातावरण को शुद्ध बनाने के लिए अभिषेक किया जाता है. शास्त्रों के अनुसार, अलग-अलग द्रव्यों से शिव जी का अभिषेक करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है.