इस साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। भारत में रात का समय होने के कारण यह ग्रहण देश में दिखाई नहीं देगा, जबकि यूरोप, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कई हिस्सों में इसे देखा जा सकेगा। भारत में दिखाई न देने की वजह से धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां सूतक काल लागू नहीं होगा और पूजा-पाठ संबंधी नियम बाध्यकारी नहीं होंगे। हालांकि ज्योतिष शास्त्रियों के अनुसार इसका प्रभाव देश की राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था पर पड़ सकता है। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक यह ग्रहण कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र में लग रहा है। इस दौरान बुधादित्य, हंस और गजकेसरी योग बन रहे हैं। ज्योतिष के जानकारों ने ग्रहण काल के दौरान शिव और नारायण के नाम स्मरण की सलाह दी है। इसके अलावा वेद, पुराण और महाभारत जैसे सनातनी ग्रंथों में भी सूर्य ग्रहण से जुड़ी पौराणिक कथाओं का उल्लेख मिलता है।