सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ की 81 वर्षीय महिला के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला पलटते हुए 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007' पर महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया. न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अधिनियम की धारा 7 के तहत गठित ट्रिब्यूनल के पास बच्चों को संपत्ति से बेदखल करने और भरण-पोषण भत्ता तय करने का अधिकार है. धारा 23 के अनुसार यदि संपत्ति लेने के बाद बच्चे माता-पिता की देखभाल नहीं करते हैं, तो गिफ्ट डीड या संपत्ति हस्तांतरण रद्द किया जा सकता है. चर्चा में वरिष्ठ नागरिकों के कानूनी अधिकार, वसीयत के नियम, संपत्ति कानून, एकल परिवार प्रणाली और संवादहीनता के विषय शामिल हैं. आंकड़े दर्शाते हैं कि 2050 तक भारत में बुजुर्गों की आबादी 34 प्रतिशत होने का अनुमान है, जिससे कानूनी और सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता रेखांकित होती है.