अहोई अष्टमी के पावन पर्व पर संतान की लंबी आयु, बेहतर स्वास्थ्य और उन्नति के लिए पूजा विधान का विशेष महत्व बताया गया है. कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर रखे जाने वाले इस व्रत में माता पार्वती के स्वरूप अहोई माता का पूजन किया जाता है. शाम को तारे निकलने के बाद पूजा के दौरान चांदी की अहोई, चांदी के मोतियों की माला, जल से भरा कलश और दूध-भात अर्पित करने का विधान है. कथा सुनने के बाद गेहूं के दाने और बायना सास को देकर आशीर्वाद लिया जाता है तथा चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत संपन्न किया जाता है. यह व्रत केवल पुत्रों के लिए ही नहीं बल्कि बेटियों की सुरक्षा और कल्याण के लिए भी किया जा सकता है. इसके साथ ही मेष से लेकर मीन राशि तक के जातकों के लिए दैनिक राशिफल, पंचांग, ग्रहों की स्थिति, लकी टिप और सफलता मंत्र की जानकारी भी साझा की गई है.