ज्योतिष शास्त्र में अक्सर पितृ दोष और कालसर्प दोष को लेकर डर का माहौल बना दिया जाता है. जीवन में आने वाली हर रुकावट, विवाह में देरी, स्वास्थ्य समस्याएं और दुर्घटनाओं को अक्सर पितृ दोष से जोड़ दिया जाता है. हालांकि प्रामाणिक ज्योतिषीय ग्रंथों के अनुसार पितृ दोष जैसा कुछ नहीं होता, बल्कि यह कुंडली में राहु की विभिन्न नकारात्मक स्थितियों का परिणाम होता है. राहु की प्रतिकूल स्थिति के कारण पूर्वजन्म के कर्मों का प्रभाव दिखाई देता है. इससे घबराने की जगह राहु के सरल उपाय किए जा सकते हैं. अमावस्या के दिन निर्धन व्यक्तियों को भोजन कराना या अन्न दान करना लाभदायक माना जाता है. इसके अतिरिक्त सार्वजनिक स्थानों पर पीपल के पौधे लगाना, ग्रहण के बाद दान करना, प्रतिदिन श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का पाठ करना और जीवन में कर्मों की शुद्धता बनाए रखना इन नकारात्मक प्रभावों को शांत करने में सहायक होता है.