अश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को पितृ विसर्जन अमावस्या के रूप में मनाया जाता है. इस दिन सूक्ष्म लोक से धरती पर आए पितरों को श्रद्धापूर्वक याद कर उनकी विदाई की जाती है. यदि पूरे पितृपक्ष में पितरों का स्मरण न किया गया हो या देहांत की तिथि अज्ञात हो, तो इस अमावस्या पर श्राद्ध और दान करने से पितरों की आत्मा को शांति प्राप्त होती है. इस अवसर पर दोपहर के समय सात्विक भोजन बनाकर पंच बलि निकालने, अग्नि में आहुति देने और सात्विक ब्राह्मण को भोजन कराने का विधान बताया गया है. इसके अलावा, पूर्वजों और पितरों का संबंध राहु ग्रह से होने के कारण इस दिन उड़द की दाल, बड़े और खीर-पूड़ी का दान करने तथा राहु मंत्रों का जप करने से राहु की बाधाओं से मुक्ति मिलती है. निर्धन व्यक्ति केवल जल तर्पण, श्रद्धा और प्रार्थना द्वारा भी श्राद्ध कर्म संपन्न कर सकते हैं.