किस्मत कनेक्शन में ज्योतिषी शैलेंद्र पांडे ने आरती के महत्व और सही नियमों की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया कि स्कंद पुराण में आरती का विशेष उल्लेख मिलता है और किसी भी पूजा-पाठ या अनुष्ठान की समाप्ति पर ही आरती की जानी चाहिए. आरती केवल ज्योति घुमाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भाव और श्रद्धा से स्तुति गाना सबसे अधिक प्रभावशाली होता है. पंचमुखी दीपक या कपूर से आरती करते समय थाल को 'ॐ' की आकृति में घुमाना चाहिए, जिसमें भगवान के चरणों में चार बार, नाभि में दो बार, मुख पर एक बार और पूरे शरीर पर सात बार घुमाने का विधान है. शैलेंद्र पांडे ने स्पष्ट किया कि आरती लेने के बाद कम से कम पांच मिनट तक जल का स्पर्श नहीं करना चाहिए और थाल में दक्षिणा नहीं डालनी चाहिए। इसके साथ ही कार्यक्रम में 4 अक्टूबर 2026 का पंचांग, ग्रहों की स्थिति, सभी 12 राशियों का दैनिक राशिफल, लकी टिप और सक्सेस मंत्र भी साझा किया गया.