आषाढ़ मास की अमावस्या तिथि पितरों की शांति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। पंचांग के अनुसार, 13 जुलाई की शाम से अमावस्या तिथि का आरंभ हो रहा है, जो 14 जुलाई तक रहेगी। इस तिथि को हलहारिणी अमावस्या और दर्श अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन किसान कृषि उपकरणों की पूजा करते हैं और बुवाई की शुरुआत करते हैं। मान्यता है कि अमावस्या पर पवित्र नदी में स्नान, दान, तर्पण और पिंड दान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने, काले तिल का दान करने और भगवान शिव की पूजा करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं। इसके अलावा, ज्योतिष शास्त्र में अमावस्या के दिन चंद्रमा की स्थिति का विशेष महत्व बताया गया है। कुंडली में कमजोर चंद्रमा को बलवान करने के लिए सोमवार का उपवास रखने, चांदी धारण करने और शिव जी को जल अर्पित करने जैसे उपाय बताए गए हैं। इन उपायों को अपनाने से जीवन में सुख, शांति और धन की वृद्धि होती है।