नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है, जिनकी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई। मां कूष्मांडा का स्वरूप अष्टभुजा है और उनका वाहन सिंह है। उनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल पुष्प, अमृत कलश, चक्र, गदा और जपमाला है। ज्योतिष में इनका संबंध बुध ग्रह से है। मां कूष्मांडा की उपासना से जटिल रोगों से मुक्ति, हकलाहट, वाणी की समस्या, मानसिक परेशानी, त्वचा रोग और कान, नाक, गले के रोग दूर होते हैं। धन और कारोबार की समस्याओं का भी समाधान मिलता है। मां को हरे वस्त्र धारण कर पूजा करनी चाहिए और मालपुआ, कुंभड़ा और हरी इलायची का भोग लगाना चाहिए। मां कूष्मांडा के मंत्र 'ओम कूष्मांडा देव्यै नमः' का 108 बार जाप करने से आयु, यश, बल और धन में वृद्धि होती है। कुंडली में कमजोर बुध को बलवान करने के लिए भी मां कूष्मांडा की उपासना विशेष लाभकारी है।