सनातन संस्कृति में ईश्वर की उपासना के लिए व्रत और उपवास का विशेष महत्व है। व्रत एक संकल्प है, जिसमें तन और मन की शुद्धि के साथ नियमों का पालन किया जाता है, जबकि उपवास मुख्य रूप से आहार से संबंधित है जिसमें निराहार रहना शामिल होता है. व्रत रखने से आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ वैज्ञानिक रूप से भी कई फायदे होते हैं. इससे शरीर डिटॉक्स होता है, पाचन तंत्र बेहतर होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है. शास्त्रों में एकादशी को सर्वश्रेष्ठ व्रत माना गया है. इसके अलावा प्रदोष, पूर्णिमा, अमावस्या और नवरात्रि के उपवास भी विशेष फलदायी होते हैं. व्रत दो प्रकार से रखा जाता है- निर्जल और फलाहारी. स्वस्थ व्यक्ति निर्जल व्रत रख सकते हैं, जबकि अन्य लोगों को जलीय या फलाहारी उपवास रखना चाहिए. व्रत के दौरान सात्विक भोजन, फल, साबूदाना और दूध का सेवन किया जा सकता है. हालांकि, शारीरिक रूप से कमजोर या डायबिटीज जैसी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए.