गणेश उत्सव के पावन अवसर पर प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश की आराधना और विशेष ज्योतिषीय उपायों की संपूर्ण जानकारी दी गई है. कार्यक्रम में बताया गया कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक चलने वाले दस दिवसीय गणेश महोत्सव में गणपति की पूजा कैसे विधि-विधान से करनी चाहिए. भगवान गणेश को मोदक, दूर्वा, पीले वस्त्र और सिंदूर अर्पित करने का विशेष महत्व है. इसके अलावा विभिन्न प्रकार के पत्तों को विशेष मंत्रों के साथ अर्पित कर संतान प्राप्ति, उत्तम स्वास्थ्य, कार्य बाधा निवारण, आर्थिक लाभ और शनि दोष शांति के उपाय बताए गए. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि पौराणिक कारणों से गणेश पूजन में तुलसी दल वर्जित है. विवाह में देरी, नौकरी में अड़चन और नया मकान बनाने की कामना के लिए भी विशेष मंत्र जप और पूजन विधान साझा किए गए हैं.