आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई लोग शारीरिक कष्टों और बीमारियों से पीड़ित हैं। कई बार बीमारी के कारणों का पता नहीं चल पाता है। ऐसे में हनुमान बाहुक का पाठ एक रामबाण उपाय है। माना जाता है कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने बांहों में असहनीय पीड़ा और तंत्र प्रयोग से मुक्ति पाने के लिए हनुमान बाहुक की रचना की थी। इसके पाठ से जीवन की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है और एक शक्तिशाली रक्षा कवच बनता है। पाठ की उत्तम विधि के लिए हनुमान जी और प्रभु श्री राम की प्रतिमा स्थापित करें। घी, आंवले या चमेली के तेल का दीपक जलाएं और एक पात्र में जल भरकर रखें। श्री राम की स्तुति के बाद हनुमान जी का ध्यान कर पाठ करें। पाठ के बाद पात्र का थोड़ा जल रोगी को पिलाएं और बचा हुआ जल रोगग्रस्त हिस्से पर लगाएं। इस पाठ की शुरुआत मंगलवार से करनी चाहिए और इसे विषम संख्या जैसे एक, तीन, पांच या ग्यारह बार करना चाहिए। पूर्ण आस्था और विश्वास के साथ किया गया यह पाठ हर संकट और पीड़ा का अंत करता है।