सावन मास की अमावस्या तिथि को हरियाली अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह तिथि शिव आराधना, प्रकृति पूजा और पितरों के तर्पण तथा पिंडदान के लिए विशेष फलदायी मानी गई है। इस दिन भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप और माता पार्वती की विधिवत पूजा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इसके अलावा जन्म कुंडली में कालसर्प दोष, शनि दोष और केतु दोष के निवारण के लिए भी इस तिथि पर विशेष उपाय किए जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार हरियाली अमावस्या पर पीपल और बरगद के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने, फलदार वृक्ष लगाने तथा जरूरतमंदों को दान-पुण्य करने से पितृदेव प्रसन्न होते हैं। इसी तिथि पर सूर्य ग्रहण का योग भी बन रहा है, जो भारत में दृश्यमान नहीं होने के कारण इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा और सभी धार्मिक कार्य नियमित रूप से किए जा सकेंगे।