सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का पावन पर्व मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन माता पार्वती की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया था. हरियाली तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य, दांपत्य जीवन में प्रेम और जीवनसाथी की दीर्घायु की कामना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है. इसके अलावा, यह पर्व अविवाहित कन्याओं के लिए भी विशेष महत्व रखता है, जिनके विवाह में बाधाएं आ रही हों या जो मनचाहा वर पाना चाहती हों. इस अवसर पर महिलाएं सोलह शृंगार करके भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा-अर्चना करती हैं. शाम के समय शिवलिंग पर पंचामृत से रुद्राभिषेक, घी का दीपक जलाने और गौरी-शंकर के मंत्रों का जाप करने से वैवाहिक तनाव दूर होता है तथा उत्तम स्वास्थ्य एवं खुशहाली का वरदान प्राप्त होता है.