पितृपक्ष के दौरान पड़ने वाली अश्विन मास की इंदिरा एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व है. एकादशी का व्रत जगत के पालनहार भगवान विष्णु और उनके विभिन्न स्वरूपों की उपासना के लिए समर्पित होता है. मान्यता के अनुसार, यदि पितृपक्ष में किसी कारणवश पूर्वजों का विधिवत श्राद्ध न हो पाया हो, तो इंदिरा एकादशी का व्रत और तर्पण करने से पितरों को मोक्ष प्राप्त होता है और पितृ दोष से राहत मिलती है. इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने, काले और नीले रंग के कपड़ों से बचने और तामसिक भोजन से दूर रहने की सलाह दी गई है. पूजा में भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप को पीले फूल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करने का विधान है. एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है तथा फलाहार या निर्जला उपवास रखने की परंपरा है. अगले दिन निर्धनों को भोजन और दान देकर व्रत का पारण किया जाता है.