ज्येष्ठ पूर्णिमा की तिथि भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की उपासना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, जरूरतमंदों को दान और ईश्वर के ध्यान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा पर चंद्रदेव अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होते हैं। इस दिन वट सावित्री का व्रत भी किया जाता है, जिसमें सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखद दांपत्य जीवन के लिए वट वृक्ष की पूजा करती हैं। पूर्णिमा पर धन प्राप्ति के लिए मां लक्ष्मी के सामने 11 पीली कौड़ियां रखकर पूजा करने का विधान है। कर्ज मुक्ति के लिए पीपल के वृक्ष के नीचे घी का दीपक जलाकर परिक्रमा करने से लाभ मिलता है। इसके अलावा, संतान प्राप्ति और घर के वास्तु दोष को दूर करने के लिए भी ज्येष्ठ पूर्णिमा पर विशेष उपाय किए जाते हैं। इस दिन 'ॐ ह्रीं श्री लक्ष्मी वासुदेवाय नमः' और 'नमः शिवाय' जैसे मंत्रों का जाप करना फलदायी होता है।